Meri Shayari 3.6

1.
आज अगर तुम्हें हो यकीन,
तुम्हें हो यकीन,
तो मुझे फिर पुकार लो,
हो सके तो फिर एक दफा,
फिर एक दफा,
तुम मुझे फिर जान लो !!

2.
फिर हवा चल पड़ी हकीक़त को यूँ लेकर,
ख्वाबों का वो पहरा कहाँ खो गया,
खलिश मेरे दिल की कुछ बढती गई ऐसे,
अश्को का सागर और गहरा हो गया !!

3.
दिल छिपाने लगा हैं तू आजकल,
रिश्तें ग़मों के बताता नहीं,
दुसरो की दुनिया में तू उलझा रहा,
अपनी ही दुनिया बनाता नहीं !!

4.
मेरी धड़कनें तू न शोर कर,
ये शाम खामोश हैं बड़ा,
राह-ए-जुस्तजू के मोड़ पर,
ये वक़्त कब से हैं खड़ा !!

5.
मौत की शमा जलती रहेगी, कितने परवाने कतार में हैं !!

6.
अश्कों का भी जीना क्या हैं,
गिरते-गिरते जी लिए,
कुछ को लम्हें ढूंढ़ रहे हैं,
कुछ को लम्हें पी लिए !!

7.
हलचल तू दिल की नशे में उतार ले, साकी से और एक जाम तू उधार ले !!

8.
अजनबी ये सफ़र,
अजनबी रहगुजर,
आओ फिर हम चले,
दो कदम एक डगर !!

9.
चलो आज फिर एक दफा उन रास्तो से गुजर कर देखते हैं, कि तुम ही कहो आखिर शुरुआत किस मोड़ से की जाए !!

-ABZH

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Meri Shayari 3.5

1.
आईने को तोड़ देने से आईना झूठा नहीं होता,
कि एक बाजी जीत लेने से कोई फरिस्ता नहीं होता !!

2.
बे-मिस्ल-ओ-मिसाल कहूँ मैं उस विसाल को,
इम्तिहान की आरज़ू को मिली उस सवाल को !!

3.
चलते-चलते उखड़े पवन छेड़ देते हैं काँटों से पुष्पों के तन,
कि इतने काँटों के इस भीड़ में किससे शिकायत करे ये चमन !!

4.
तारीखों के पन्नों की रंगीनियों में डूबनेवाले इस दुनिया में कम नहीं हैं,
कि बस इतना याद रहे की उन पन्नों को पलटनेवाला कोई और हैं !!

5.
कि सुख हैं छाव तो दुःख धूप हैं,
इस ज़िन्दगी के तो दो ही रूप हैं !!

6.
नहीं रहा किसी नीति से रिश्ता,
प्रकृति मुझसे खेल रही हैं,
हर मकाम पर दिया अग्नी-परीक्षा,
मेरी राहें कब से झेल रही हैं !!

7.
मोहब्बत भरी ज़िन्दगी देखी हैं, कि ये नया क्या हैं जो फिर मोहब्बत करें !!

8.
लहरों की तरह टूटा हूँ,
खुद से बेखुद रूठा हूँ,
ऐ साहिल मुझ पर इल्ज़ाम न दे,
कि माना अब तेरा मेरा साथ नहीं ,
पर मेरा तूफ़ान उठाने में हाथ नहीं !!

9.
कोई दिलकश नज़ारा चलो हम बनाते हैं,
ज़िन्दगी को एक नए सिरे से फिर सजाते हैं !!

-ABZH

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Bhor ki kiranein

भोर की किरणें,
मिलने हैं आये,
अब रात नहीं,
रौशन हैं राहें !!

रंज की बातें,
आज भुला दे,
अश्क के बदले,
सबको दुआ दे !!

खोल तू आँखें,
मन की निगाहें,
जागी हैं चाहें,
थाम ले बाहें !!

उड़ जा गगन में,
तिनके बिछा दे,
बादल से ऊँचा,
घर तू बना दे !!

-ABZH

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Jee lo abhi

जी लो अभी तुम ज़िन्दगी,
न जाने ये कब छुट जाए,
इशारे धड़कनों की समझो कभी,
न जाने ये कब रूठ जाए !!

तुम इन बेनाम राहों को इतना न मोड़ो,
हर एक मंजिल से रिश्ता इनका न जोड़ो,
फिर आशियाने बनेंगे तुम तिनके तो जोड़ो,
मुकद्दर में क्या लिखा हैं उन बातों को छोड़ो !!

भर लो अभी तुम त्रिष्णगी,
न जाने ये कब मिट जाए,
इज़ाज़त मोहब्बत की ले लो अभी,
न जाने ये कब रीति जाए !!

-ABZH

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Jaane do

तुम सोचना फिर कभी,
जो हुआ वो जाने दो,
ये वक़्त ठहरा हैं अभी,
कुछ और दूर जाने दो,
अब छिपाना हैं क्या,
अश्कों को बह जाने दो,
जो कभी तुम्हारा न था,
छोड़ो उसे जाने दो !!

दिल रूठ न तू बेवजह,
अभी थोड़ा संभल जाने दो,
तुम छेड़ों न कच्चे इर्ज़ को,
ये बात बदल जाने दो,
परवाना हैं दिल दर्द का,
किसी शमा में जल जाने दो,
नशे में हैं हम इस कदर,
मेहकदो को मचल जाने दो !!

ज़िक्र न कर उस रात का,
थोड़ी सांस निकल जाने दो,
क्या कहूँ उस बात का,
मेरे सीने में पिघल जाने दो,
राहों से करें क्या गिला,
यूँ ही कदमों को फिसल जाने दो,
फिर छेड़ेंगे ये किस्सा कल सुबह,
ये रात निकल जाने दो !!

-ABZH

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Samay ke prashn

सतत समय हमें परख रहा हैं,
पग अटके हैं प्रश्नों के पथ पर,
समय की विचित्र प्रश्नावली हैं,
अनंत प्रश्नों के हमें देने हैं उत्तर,
क्यों ये जलाशय आज स्तब्ध हैं,
भाव अभ्रों से रिक्त हैं अम्बर,
किस कारण अरण्य निःशब्द हैं,
विटपों के पर्ण, विहगों के पर,
क्यों शिलाओं की छायाचित्र स्थिर हैं,
अदृश्य हैं सूर्य की किरणों के वर्तन,
क्यों चारो दिशाओं से आवृत मार्ग हैं,
ढूंढने मैं निकला किन प्रश्नों के उत्तर !! -ABZH

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Aashayein

आशाएँ, आशाएँ,
जीने की रीत सिखाएं !!

सुखा था दरिया,
मौसम की रवानी,
पानी का कतरा,
कहता कहानी,
बादल न माना,
उसने भी ठानी,
इतना वो बरसा,
पानी ही पानी !!

आशाएँ, आशाएँ,
सीने से सबको लगाए !!
-ABZH

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