Jaane do

तुम सोचना फिर कभी,
जो हुआ वो जाने दो,
ये वक़्त ठहरा हैं अभी,
कुछ और दूर जाने दो,
अब छिपाना हैं क्या,
अश्कों को बह जाने दो,
जो कभी तुम्हारा न था,
छोड़ो उसे जाने दो !!

दिल रूठ न तू बेवजह,
अभी थोड़ा संभल जाने दो,
तुम छेड़ों न कच्चे इर्ज़ को,
ये बात बदल जाने दो,
परवाना हैं दिल दर्द का,
किसी शमा में जल जाने दो,
नशे में हैं हम इस कदर,
मेहकदो को मचल जाने दो !!

ज़िक्र न कर उस रात का,
थोड़ी सांस निकल जाने दो,
क्या कहूँ उस बात का,
मेरे सीने में पिघल जाने दो,
राहों से करें क्या गिला,
यूँ ही कदमों को फिसल जाने दो,
फिर छेड़ेंगे ये किस्सा कल सुबह,
ये रात निकल जाने दो !!

-ABZH

Posted in Uncategorized | 1 Comment

Samay ke prashn

सतत समय हमें परख रहा हैं,
पग अटके हैं प्रश्नों के पथ पर,
समय की विचित्र प्रश्नावली हैं,
अनंत प्रश्नों के हमें देने हैं उत्तर,
क्यों ये जलाशय आज स्तब्ध हैं,
भाव अभ्रों से रिक्त हैं अम्बर,
किस कारण अरण्य निःशब्द हैं,
विटपों के पर्ण, विहगों के पर,
क्यों शिलाओं की छायाचित्र स्थिर हैं,
अदृश्य हैं सूर्य की किरणों के वर्तन,
क्यों चारो दिशाओं से आवृत मार्ग हैं,
ढूंढने मैं निकला किन प्रश्नों के उत्तर !! -ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Aashayein

आशाएँ, आशाएँ,
जीने की रीत सिखाएं !!

सुखा था दरिया,
मौसम की रवानी,
पानी का कतरा,
कहता कहानी,
बादल न माना,
उसने भी ठानी,
इतना वो बरसा,
पानी ही पानी !!

आशाएँ, आशाएँ,
सीने से सबको लगाए !!
-ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Chaar pal ka hisaab

चार पल का हिसाब क्या रखे,
जब ज़िन्दगी का रखा ही नहीं,
रौशनी का रिवाज़ क्या रखे,
जब कभी दीपक जला ही नहीं !!

दर्द के बिना क्या हैं जीना,
अश्क नहीं तो फिर क्या हैं पीना,
खो कर सबकुछ हमे हैं जाना,
खोया नहीं तो फिर क्या हैं पाना !!

हम मंजिल का इंतज़ार क्या करे,
जब उन राहों पे चले ही नहीं,
तेरी महफ़िल में मेरे यार क्या करे,
जब तेरी आँखों में गिले ही नहीं !!

तू जो नहीं सौगात ही क्या हैं,
तेरी बात नहीं तो मेरी बात ही क्या हैं,
हाथ नहीं तो साथ ही क्या हैं,
तेरी जीत नहीं तो मेरी मात ही क्या है !!

-ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Samar shesh nahi hain

डोर किरणों की कब तक खींचें,
अब ज़मीन भी रो गया,
साँझ हैं देखो गोधूली हैं,
सूरज भी पश्चिम में सो गया,
कभी रौशनी ही रौशनी थी,
बस चार पल में क्या हुआ,
अविरत जो दृश्य दिख रहा था,
कहाँ तम के छल में खो गया,
पर ऐ पथिक तू कोई दृश्य नहीं हैं,
जो खो जाए किसी अँधेरे में,
तू रश्मि-रंजित कोई पुष्प नहीं हैं,
जो खिलता हो किसी सवेरे में,
तेरी मौन मुद्रा कभी परिहास्य नहीं हैं,
संकट की अभिव्यक्ति तेरी प्यास नहीं हैं,
हौसला रख ये तम अशेष नहीं हैं,
कि अभी प्रारंभ हैं समर शेष नहीं हैं !! -ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Mil na sake hum

दिल ने फिर दुआ दी,
कुछ ऐसी आरज़ू की,
जैसे आँखों में मेरे,
दफ़न हो रही थी,
जलती रही वो,
एक मरासिम ऐसी,
आहों के दर पर,
हम बैठे कुछ ऐसे,
अश्कों के समंदर,
में हम डूबे हो जैसे,
चंद साँसों के दम पर,
फिर चलते रहे हम,
हर मोड़ पे रुके पर,
फिर मिल न सके हम !! -ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

saans ruk gaii

सुबह भी आई,
रात भी गई,
छाँव जब मांगी,
धुप मिल गई,
चाह थी छोटी,
बात पर कई,
राह जब मिली,
मंजिल छूट गई,
धुन थी नई,
गीत भी कई,
नज़्म जब मेरी,
महफ़िल उठ गई,
आह थी मेरी,
जज़्बात भी वही,
आवाज़ जब बनी,
साँस रुक गई !! -ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Meri Shayari 3.4

1.
मेरे दिल की तलाशी लेने वाले,
तू कभी सोज़-ए-गम पे भी यकीन कर,
महफिलों में ज़न्नत ढूंढने वाले,
तू कभी मिट्टी के घरों में भी ढूंढने चल !! -ABZH

2.
मैं सोचता हूँ, यह मनुज भी कभी-कभी कितना आश्चर्य कृत्य करता हैं ,
खुद तो प्यार मोहब्बत से रह नहीं पाया, इन पत्तों और फूलों को जुदा करता हैं,
पत्थरों और इस नश्वर दुनिया को सजाने के लिए, क्यों इनकी प्यार भरी दुनिया तबाह करता हैं !
– ABZH (From Phool Aur Pattein)

3.
वो वाकिफ नहीं था रहम-ओ-करम से,
या फिर कानूनी नहीं था मेरा आशियाना,
वो तूफ़ान लाया बेसबब किस भरम से,
कि मुमकिन नहीं था फिर घर बसाना !! -ABZH

4.
कि तुम मुद्दतों बाद जलजले की बात करते हों, यहाँ तो हर रोज क़यामत आती हैं !! -ABZH

5.
कि एक राह गुजरती हैं मेरे सूने ख्वाबों में,
हर मोड़ पे रुकती हैं जाने किसके यादों में !! -ABZH

6.
ऐतबार-ए-इंतज़ार हम कितना कर गए ,
ये किसे मालुम यहाँ !!
कि कौल-ओ-करार हम कितना कर गए,
ये किसे मालुम यहाँ !! -ABZH

7.
शिकायत करे क्या हम,
इन अश्कों से क्या गम,
दिल की दीवारें हुई फिर से नम,
कि अब हम तुम नहीं हम-तुम !! -ABZH

8.
अजनबी तो हम थे ही पहले, फिर हुए तो क्या हैं गम !! -ABZH

9.
कि आशना हैं ये जान हमारी,
पर तेरी महफ़िल का तलबगार नहीं,
ऐसे आते होंगे चाँद-सितारे,
पर तेरी महफ़िल में वो प्यार नहीं !! -ABZH

10.
दिलकश आरज़ू,किसी की रिक्क़त,
वो जन्नत और रूमानी मौसम,
किसी की जुस्तजू, दिल की गैरत,
वो मोहब्बत और जाह-ओ-हशम,
ऐसे तो इनके बगैर भी कितने लोग जिंदा हैं,
फिर ऐ दिल तू ही क्यों शिकवा करे !! -ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Koun hun main

लिख लेता हूँ जो भी दर्द हैं दिल में,
किसी वज़्म का फ़नकार नहीं हूँ !!

दुःख भरे गीतों का बोल हूँ मैं,
अश्क हूँ झंकार नहीं हूँ !!

दर्द से तो खैर इश्ककारी हैं अपनी,
वफ़ा हूँ किसी का इंकार नहीं हूँ !!

जलती धुप में ही जन्नत हैं मेरी,
ठंडी छाँव का खुमार नहीं हूँ !!

उनसे मिलने की तमन्ना तो दिल में न रही,
किसी के आने की सोच हूँ इंतजार नहीं हूँ !!

-ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment

Panchhi ud jaa dur gagan me

ऐ पँछी उड़ जा दूर गगन में,
इस धरती पर बसेरा तू न कर !!

स्वार्थ समंदर में डूबी दुनिया,
तुझे पिजड़े में रख लेगी,
दो-चार रोज तेरी भूख मिटाकर,
ये तेरी नीलामी कर देगी,
लेकर तेरी प्राणों की आहुति,
जिब्ह्वा की तृप्ति कर लेगी !!

ऐ पँछी उड़ जा दूर गगन में,
बादलों से तूफानों से तू न डर !!

हौसले की चिंगारी तेरे परो में,
हैं अजेय अभिलाषा तेरे नयन में,
तू किरणों से उज्जवलित उरो में,
तू साहस का हैं सन्देश पवन में,
अब उदाहरण बन तू घरो-घरो में,
चल स्वतंत्र हैं तू उड़ निडर गगन में !!

ऐ पँछी उड़ जा दूर गगन में,
इस धरती पर बसेरा तू न कर !!

-ABZH

Posted in Uncategorized | Leave a comment