Is Jahaan Mein

Posted: अगस्त 17, 2014 in Uncategorized

इस जहां में जो ताशीर हैं, हैं तेरे ही किरदार का,
खुदा न बन सका तो क्या, शहरयार हैं बाजार का॥

हर जवाब तेरा हैं लिखा, जो भी हैं तेरे सवाल का,
फिर भी खुदा का नाम ले, तू हाकिम हैं कमाल का ॥

कुश्त-ओ-खून ये फ़ुज़ूल हैं, जुबां से डर कर हम मरे,
अब इन्साफ क्या मिले हमें, तू जो कहे वो हम करे ॥

वो चाँद जो खिला था कल, वो भी दाग़-दार हो गया,
अब ज़मीं पर देखता नहीं, हो बे-दार फिर वो सो गया ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

Koi Chirag Nahi

Posted: अगस्त 14, 2014 in Uncategorized

कोई चिराग नहीं है मगर उजाला है,
ग़जल की शाख पे इक फूल खिलने वाला है।

ग़जब की धूप है, एक बेलिवास पत्थर पर,
पहाड़ पर तेरी बरसात का दुशाला है।

अजीब लहज़ा है दुश्मन की मुस्कुराहट का,
कभी गिराया है मुझको कभी संभाला है।

निकल के पास की मास्जिद से एक बच्चे ने,
फ़साद में जली मूरत पे हार डाला है।

तमाम वादियों में सहरा में आग रौशन है,
मुझे खिज़ां के इन्हीं मौसमों ने पाला है। -बशीर बद्र

Neemat Hain Uski

Posted: जुलाई 27, 2014 in Uncategorized

कि नीमत हैं उसकी तो ये हालात कम हैं,
हमें अपनी नाकामियों से कहाँ कोई ग़म हैं,
नफरतों और जफ़ाओं के दैर-ओ-हरम हैं,
कहो किसके खुदा का क़यामत करम हैं ॥

चलो रूह-ओ-नज़र एक आइना तराशे,
करे नाशाद ये दिल हर हक़-आशना से,
शब-ओ-रोज़ इबादत करे अपने खुदा से,
फिर मुहब्बत से जी ले, फिर जी ले वफ़ा से ॥

अकबर हो या सिकंदर जहां सबसे छूटा,
कुछ मिट्टी के पुतलों ने मिट्टी को लूटा,
हुआ खून जाया वो अबदियत था झूठा,
तसलीम नहीं था कि मुकद्दर था फूटा ॥

कहो अब भी तुम्हें क्या आज़माना हैं बाकी,
कि और कितने छींटें लहू के छिपाना हैं बाकी,
कहाँ-कहाँ ज़ुल्म-ओ-हुकूमत चलाना हैं बाकी,
कि और क्या-क्या खुदा को दिखाना हैं बाकी ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

Paaya To Kya Paaya

Posted: जुलाई 14, 2014 in Uncategorized

मैं सोच रहा, सिर पर अपार,
दिन, मास, वर्ष का धरे भार,
पल, प्रतिपल का अंबार लगा,
आखिर पाया तो क्या पाया?

जब तान छिड़ी, मैं बोल उठा,
जब थाप पड़ी, पग डोल उठा,
औरों के स्वर में स्वर भर कर,
अब तक गाया तो क्या गाया?

सब लुटा विश्व को रंक हुआ,
रीता तब मेरा अंक हुआ,
दाता से फिर याचक बनकर,
कण-कण पाया तो क्या पाया?

जिस ओर उठी अंगुली जग की,
उस ओर मुड़ी गति भी पग की,
जग के अंचल से बंधा हुआ,
खिंचता आया तो क्या आया?

जो वर्तमान ने उगल दिया,
उसको भविष्य ने निगल लिया,
है ज्ञान, सत्य ही श्रेष्ठ किंतु,
जूठन खाया तो क्या खाया? – हरिशंकर परसाई

 
 

O Mere Aasmaan

Posted: जून 23, 2014 in Uncategorized

ओ मेरे आसमां, ओ मेरे आसमां ॥

अपने सूरज को थोड़ा कम कर दे,
अपनी आँखों को थोड़ा नम कर दे,
कब से प्यासी हैं तेरी धरती,
अपनी धरती पे कुछ रहम कर दे ॥

ओ मेरे आसमां, ओ मेरे आसमां ॥

सारे तारे उदास बैठे हैं,
चाँद के आस-पास बैठे हैं,
इतने रौशन हैं दिख नहीं सकते,
इसलिए बद-हवास बैठे हैं ॥

तू बता दे उजाला किसका हैं ?
नूर में ये हवाला किसका हैं ?
इसकी गिनती का कुछ करम कर दे,
अपनी धरती पे कुछ रहम कर दे ॥

ओ मेरे आसमां, ओ मेरे आसमां ॥ -डॉ कुमार विश्वास

Kah Liya Karo

Posted: मई 30, 2014 in Uncategorized

हर बेज़बाँ को शोला नवा कह लिया करो,
यारो सुकूत ही को सदा कह लिया करो ।

खुद को फरेब दो की न हो तल्ख़ ज़िंदगी,
हर संगदिल को जान-ए-वफ़ा कह लिया करो ।

गर चाहते हो खुश रहें कुछ बन्दगान-ए-ख़ास,
जितने सनम हैं उन को खुदा कह लिया करो ।

इंसान का अगर क़द-ओ-क़यामत न बढ़ सके,
तुम इस को नुक्स-ए-आब-ओ-हवा कह लिया करो ।

अपने लिए अब एक ही राह-ए-निजात हैं,
हर ज़ुल्म को रज़ा-ए-खुदा कह लिया करो ।

ले दे के अब यही है निशान-ए-जिया ‘क़ातील ‘,
जब दिल जले तो उस को दीया कह लिया करो । -क़ातील शिफ़ाई

He Ishwar

Posted: मई 27, 2014 in Uncategorized

कहाँ-कहाँ मैं ढूँढू तुझको,
कहाँ से देखू तेरा सितारा,
मैं जीता जब भी तू ही जीता,
जब कभी हारा मैं ही हारा ।

इस कुल रहूँ या उस कुल रहूँ,
मैं तो धरा का धूल रहूँ,
कौन सुनेगा व्यवच्छेद ये मेरा,
मैं तो अनन्तर भूल रहूँ ।

अधिकार नहीं मिलता विनय से,
जब नीति हो मूक अनीति के भय से,
क्यों द्वार हैं बंद तू पूछ ह्रदय से,
नहीं अर्थ तुझे क्या धर्म के क्षय से?

हे ईश्वर ! तू यदि हैं, इस नश्वर जग में,
तनिक दया भी शेष जो तेरे रग में,
तेरे नेत्र नहीं क्यों नीर बहाते ,
गुहार ये तुम तक क्यों नहीं जाते । -चन्द्र शेखर तिवारी