1.
आज अगर तुम्हें हो यकीन,
तुम्हें हो यकीन,
तो मुझे फिर पुकार लो,
हो सके तो फिर एक दफा,
फिर एक दफा,
तुम मुझे फिर जान लो !!
2.
फिर हवा चल पड़ी हकीक़त को यूँ लेकर,
ख्वाबों का वो पहरा कहाँ खो गया,
खलिश मेरे दिल की कुछ बढती गई ऐसे,
अश्को का सागर और गहरा हो गया !!
3.
दिल छिपाने लगा हैं तू आजकल,
रिश्तें ग़मों के बताता नहीं,
दुसरो की दुनिया में तू उलझा रहा,
अपनी ही दुनिया बनाता नहीं !!
4.
मेरी धड़कनें तू न शोर कर,
ये शाम खामोश हैं बड़ा,
राह-ए-जुस्तजू के मोड़ पर,
ये वक़्त कब से हैं खड़ा !!
5.
मौत की शमा जलती रहेगी, कितने परवाने कतार में हैं !!
6.
अश्कों का भी जीना क्या हैं,
गिरते-गिरते जी लिए,
कुछ को लम्हें ढूंढ़ रहे हैं,
कुछ को लम्हें पी लिए !!
7.
हलचल तू दिल की नशे में उतार ले, साकी से और एक जाम तू उधार ले !!
8.
अजनबी ये सफ़र,
अजनबी रहगुजर,
आओ फिर हम चले,
दो कदम एक डगर !!
9.
चलो आज फिर एक दफा उन रास्तो से गुजर कर देखते हैं, कि तुम ही कहो आखिर शुरुआत किस मोड़ से की जाए !!
-ABZH