सतत समय हमें परख रहा हैं,
पग अटके हैं प्रश्नों के पथ पर,
समय की विचित्र प्रश्नावली हैं,
अनंत प्रश्नों के हमें देने हैं उत्तर,
क्यों ये जलाशय आज स्तब्ध हैं,
भाव अभ्रों से रिक्त हैं अम्बर,
किस कारण अरण्य निःशब्द हैं,
विटपों के पर्ण, विहगों के पर,
क्यों शिलाओं की छायाचित्र स्थिर हैं,
अदृश्य हैं सूर्य की किरणों के वर्तन,
क्यों चारो दिशाओं से आवृत मार्ग हैं,
ढूंढने मैं निकला किन प्रश्नों के उत्तर !! -ABZH
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