तुम सोचना फिर कभी,
जो हुआ वो जाने दो,
ये वक़्त ठहरा हैं अभी,
कुछ और दूर जाने दो,
अब छिपाना हैं क्या,
अश्कों को बह जाने दो,
जो कभी तुम्हारा न था,
छोड़ो उसे जाने दो !!
दिल रूठ न तू बेवजह,
अभी थोड़ा संभल जाने दो,
तुम छेड़ों न कच्चे इर्ज़ को,
ये बात बदल जाने दो,
परवाना हैं दिल दर्द का,
किसी शमा में जल जाने दो,
नशे में हैं हम इस कदर,
मेहकदो को मचल जाने दो !!
ज़िक्र न कर उस रात का,
थोड़ी सांस निकल जाने दो,
क्या कहूँ उस बात का,
मेरे सीने में पिघल जाने दो,
राहों से करें क्या गिला,
यूँ ही कदमों को फिसल जाने दो,
फिर छेड़ेंगे ये किस्सा कल सुबह,
ये रात निकल जाने दो !!
-ABZH
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