My Shayari New 1.7

Posted: नवम्बर 21, 2010 in Uncategorized

1.
आँखों ने सोचा नहीं, अश्को को पर था यकीन !!
साँसों से जुड़कर कभी, होंगे वो कल यु अजनबी !!

2.
सिर्फ एक महफूज़ कारवाँ ही सब कुछ नहीं हैं, ज़िन्दगी जीने के दरीचे कई और भी हैं !!
यु तो ये रिश्ते धागों के जोर पर टिके होते हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं जहाँ कोई डोर नहीं हैं !!

3.
फिर एक बार न जाने क्यों दिल की धूमिल ख्वाइश पर उलझे हसरतों की जुस्तजू टिकी हैं,
ऐ दुनिया तेरा शुक्रिया कि तेरे दर पर अपनी तो हर एक चाहत हर एक आरजू बिकी हैं !!

4.
राहत-ए-तन्हाई जिंदगी सौदाई, दर्द-ए-जुनून लेकर फिर तेरी याद आई !!

5.
अश्कों को तुम छेड़ो मत की ये लहू जिगर के हैं, दर्द भाव हैं ये जीवन के सिर्फ ख़ुशी से डरते हैं !!

6.
हसरतों के सूने मेलें अब नहीं लगते; नहीं सजती उम्मीदों की वो झूठी महफ़िल; और नहीं आज यह परवाना किसी शमा में जला करता हैं,
बस कुछ अश्कों का काफिला मिलता हैं; और आज न जाने क्यों यह दिल फिर किसी बेवफा की खोज में हैं और हर वफ़ा से डरा करता हैं !

7.
आखिर,हम उस खुदा से क्यों शिकायत करें? काश,की दिल उसके भी कभी टूटे होते,किसी बेवफा से मोहब्बत की अर्ज़ रही होती !!

8.
ये इंतज़ार तो एक कश्मकश की दीवार थी; जिसे हमने माना, हम तो आज भी खड़े हैं उसी मकाम पर; तुने बदला ठिकाना !!

9.
काश तारीखें भी पीछे चलती, फिर तो न जाने कितनी ज़िंदगियाँ फिर से जी उठती, कितने वादे फिर से किये जाते, और कितने टूटे दिल एक बार फिर जूट जाते !!

10.
अब कभी राह में तुम हमें मिल जाओं ये मुमकीन नहीं, हम चाहें भी तो कितना जब इन राहों पे यकीन नहीं !!

– ABZH

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