Tune jo muskura diya

Posted: दिसम्बर 6, 2010 in Uncategorized

तुने जो मुस्कुरा दिया,
चँदा भी बादल में छिप गया,
शरमा के,
तेरे आगे,
और ये लम्हा रुक गया !

बात कहनी थी,
जो तुझसे मिलते ही,
जाने अब तक,
मैं क्यों कह न पाया !

मेरे ख़्वाबों में,
बस तेरी बातें हैं,
आज सबकुछ खोकर,
तुझे मैंने पाया !

कैसे करूँ तेरा शुक्रिया,
ये दिल जाने मैं कैसे जिया,
तुम मिले तो,
लगे मुझको,
मुझे मेरा जहां मिल गया !

-ABZH

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