Naya Saal

Posted: जनवरी 1, 2011 in Uncategorized

ये मुमकिन हैं कि तू फिर खुश हो जाये,
कि नया साल हैं आया तुझे वो बुलाये,
ऐसा साल न आया जो आ कर न जाये,
कि गया साल वो पुराना गयी वो सजाए !!

ये मुमकिन हैं की तू जो चाहे वो पाये,
कर स्वागत नये साल का खोले दोनों बाहें ,
कितनो ने तोड़े हैं रिश्ते कितनो ने ठुकराये,
कर शुरुवात नये साल का छोड़ पुरानी राहें !!

-ABZH

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