Hawayen Whiteliner Nahi Hoti

Posted: जनवरी 28, 2011 in Uncategorized

हाँ,हवायें व्हाईटलाइनर नहीं होती । सड़क के एक कोने में बैठा एक भिखारी भी व्हाईटलाइनर नहीं होता । लेकिन तकदीर व्हाईटलाइनर हो सकती हैं । ऐसे मेरी तकदीर व्हाईटलाइनर नहीं थी । फिर भी मेरे मन में एक अजब संतोष था कि जो भी हो मेरी तकदीर और हवायें तो एक ही श्रेणी में आते हैं । मैंने दर्जनों रईशजादो से व्हाईटलाइनर गाड़ियों में यात्रा करने की वकालत सुनी है:व्हाईटलाइनर ये,व्हाईटलाइनर वो और भी भांति-भांति के साधन जो यात्रा आरामदायक करे । लेकिन,कोई भी व्हाईटलाइनर हवा नहीं ले सकता । सड़क के एक कोने में बैठा वो भिखारी जो हवा लेता है सब के सब चाहे कितने भी अमीर हो वही हवा लेते है । हाँ,मैं मानता हूँ की और नाना तरहों की अन्य सुविधाएँ ली जा सकती हैं । वो कार में यातायात करते है, व्हाईटलाइनर बसों में यात्रा करते हैं, मल्टीप्लेक्सों,बरिस्ता,फोरम माल और सिटी सेंटर जैसे जगहों में समय बिताते हैं,पाँच और सात सितारा होटल्स में खाना-पीना करते है और कितने ही अन्य सुविधाओं का भोग करते हैं जिसे प्राप्त करने के लिए व्हाईटलाइनर तकदीर का होना अपरिहार्य हैं । जो भी हो यह सब बातें सोचते हुए अपनी धुन में लेकटाउन से नागेर बाज़ार जाने वाली ऑटो रिक्शा पर बैठा । जैसे ही बैठा एक सज्जन आकर मेरे से बोले “आमार जरूरी काज आचे..आपनी की नेक्स्ट ऑटो ते आसबेन?” यानि की “मुझे कुछ काम हैं क्या आप इसके बाद वाले ऑटो से जा सकते हैं?” । मेरे मन ने कहा नेक्स्ट में तो नहीं जाना,लेकिन ऐसा करते है की अडजस्ट करके एक सीट पर दो बैठ कर जाते हैं । मैंने बोला “आमी साइड ते बोस्बो..आपनी बोसे जान.” यानि की “मैं बगल में बैठ जाऊँगा..आप बैठिये.”।

खुश हो कर सज्जन बैठ गये और वो इतना खुश हुए की अपने जेब से सिगारेट निकाल कर सुलगा लिए और धुआं फूँकना शुरु । सामने का सीट पूरा धुआं-धुआं हो गया और साहब भी व्हाईटलाइनर हो गये पर उनको तनिक भी दिक्कत नहीं हुई । देखते देखते पूरा हवा व्हाईटलाइनर हो गया । मैंने नेक्स्ट ऑटो में जाना ही मुनासिब समझा क्योंकि यह हवा व्हाईटलाइनर थी और मेरे मन ने कहा “मै व्हाईटलाइनर हवा नहीं ले सकता..मेरी तकदीर व्हाईटलाइनर नहीं है” ।

मै अब तक जो सोच रहा था की हवा व्हाईटलाइनर नहीं हो सकती वो मेरे आँखों के सामने व्हाईटलाइनर बन गई थी । इन रईशजादो ने आखिर हवा भी व्हाईटलाइनर कर दिया । मै कितना ग़लत था की भले ही मै भाव में सही था,लेकिन भावहीनता हो तो मै सरासर गलत था । वो ऑटो भी चल पड़ा और फिर मै भी यात्रियों की कतार में खड़ा होकर नेक्स्ट ऑटो का इंतज़ार करने लगा । ऑटो आ गया|मैं भी बैठा और कुछ ही मिनीटो में घर पहुँच गया ।

घर पहुंचकर खुले हवा में गहरी सांस ली और मन में कहा की दुनिया व्हाईटलाइनर हो सकती हैं पर ….ये हवा व्हाईटलाइनर नहीं हो सकती …मैं व्हाईटलाइनर नहीं हो सकता !!

-ABZH

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