Shayari 2.0

Posted: फ़रवरी 5, 2011 in Uncategorized

1.
ये मुड़ के न देखें फूलों की बस्ती, ये हैं तो हैं जिंदा करोड़ों की हस्ती !! -ABZH (भारतीय सैनिकों को सलाम)

2.
बीते लम्हों के समंदर में ये दुनिया क़ैद हैं कुछ इस तरह ,
कि अगर कोई किनारा ढूँढ ले तो उसे मौत का इनाम मिले !! -ABZH

3.
मैं कभी कपड़े को तो कभी कपड़े से अपने आँखों को पोछता हूँ,
कभी बैठे ही बैठे तो कभी खड़े होकर बड़े आश्चर्य से सोचता हूँ,
कमबख्त ! उम्र के ढलान पे आकर दुनिया की भाषा सीख गया,
जो हमेशा सच बोलता था आज देखो कैसे झूठ बोलना सीख गया,
कल पहली बार था जब ये न रोया न इसके अंतर में कोई शूल गया,
बरसों बाद जब मैं उस गली से गुजरा ये उसके घर का रस्ता भूल गया !! -ABZH

4.
आइना कभी शोर नहीं करता,
सच बड़ी ख़ामोशी से बयान करता हैं,
कि सौ झूठ से कभी एक सच नहीं मरता,
शोर तो इंसान की जुबान करता हैं !! -ABZH

5.
बड़े मुद्दत से इंतजार था इस चाँदनी का कि कोई उस चाँद से पूँछे उसे ये रौशनी मिली कहाँ से?
-ABZH

6.
यु तो मौत से छिप-छिपाकर ये ज़िन्दगी भी हमसे रोज मिलने आती हैं,
पर देखना ये हैं की आखिर ये खेल भी मौत को कब तक मंजूर हैं !! -ABZH

7.
ये कमबख्त पानी भी कुछ अजीब ज़मीनी मोहब्बत के गिरफ्त में हैं,
कितना भी उपर चला जाये आखिर इसे गिरना तो ज़मीन पर ही हैं !! -ABZH

8.
अश्कों का भी जीना क्या हैं,
गिरते-गिरते जी लिए,
कुछ को लम्हें ढूंढ़ रहे हैं,
कुछ को लम्हें पी लिए !! -ABZH

9.
ये रंगीन याराहते ज़िन्दगी की,
बहुत कुछ तुम्हें हँस कर खोना पड़ेगा,
जिन्हें थक कर नींद आ गयी हो ज़मीन पर,
खुदा भी हैं हारे उनका फिर क्या ये जमाना करेगा !! -ABZH

10.
ज़िन्दगी को तो शिकस्त मिलनी ही हैं, मौत को हर रोज न आवाज़ दो !! -ABZH

— In progress.

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