Meri Shayari 2.8

Posted: अगस्त 5, 2011 in Uncategorized

1.
जो उसके कदम इस ज़मीन पे पड़े, फिर गुलरेज की बातें क्या ‘जिंदा’ करे !! -ABZH

2.
उस शाम हमें कहाँ होश था,
इन आँखों में सरफ़रोश था,
कुछ सांसें थकी-थकी सी थी,
कुछ दीवानगी का दोष था !! -ABZH

3.
जिन राहों से मंजिल मिलती हों,
उन राहों पे हम चलते नहीं,
कि तूफानों का पीछा करते हैं,
किनारों पे हम मिलते नहीं !! -ABZH

4.
चाँद-सितारे से भी हैं प्यारे, दुःख हो या सुख ये दोस्त हमारे !! -ABZH

5.
वो ज़राफ़त कहाँ हैं,
वो शराफ़त कहाँ हैं,
मेरी बेक़रारी की वो आफ़त कहाँ हैं !! -ABZH

6.
कि मंजर नजर आ जाता हैं चाहे कोई रहगुज़र हों या न हों,
कि सफ़र गुज़र ही जाता हैं चाहे कोई हमसफ़र हों या न हों !! -ABZH

7.
देखना चाहूँ एक बार तुझे फिर पर क्या ये आँख नहीं रोएगा,
दिल की जो माने तो छोड़ ये ‘जिंदा’ फिर एक रात नहीं सोएगा !! -ABZH

8.
ऐ पंद्रह अगस्त तू आज हमें फिर याद आया,
हैं नमन शहीदों को जिन्होंने हिन्दोस्तां बनाया !! -ABZH

9.
कि अश्कों को बस एक बहाना चाहिए था, उन्हें इन आँखों से मोहब्बत ही कब था !! -ABZH

10.
ऐ दुनियावालो, तुम खुदा को रिश्वत देना छोड़ दो, कि ज़मीन से कोई आवाज़ आसमान तक नहीं पहुँचती !! -ABZH

-ABZH

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