Meri Shayari 2.9

Posted: सितम्बर 10, 2011 in Uncategorized

1.
ऐसे बनना और बिगड़ना तो लहरों की फितरत में हैं , मगर अपनी ज़िन्दगी पर कुछ ज्यादा भरोसा करना भी ठीक नहीं !! -ABZH

2.
जिसे ज़िन्दगी खैरात में मिली हो, वो एक बार मौत से मिलकर देख ले !! -ABZH

3.
फक्र तो हमें आज भी हैं उन वादों पर, कि जिनके दम से आज भी एक शख्स ‘जिंदा’ हैं !! -ABZH

4.
तू ही हैं मौला,
तू ही ज़िन्दगी हैं,
कि तुम बिन ये जीना,
जीना नहीं हैं !! -ABZH

5.
ऐसे चाँद और सूरज आसमान के लिए हैं,
फिर भी ज़मीन पर सवेरा होता हैं,
ऐसे बादल और बिजली आसमान के लिए हैं,
फिर भी पानी ज़मीन पर ही गिरता हैं -ABZH

6.
ऐ ज़िन्दगी तू बस इतना वफ़ा कर, कि तू मुझसे कभी न वफ़ा कर !! -ABZH

7.
कहीं ये ख़ुशी हैं, कहीं ग़म का प्याला,
शराबी कोई हैं, कोई पैसे वाला |
कहीं ये पानी हैं, कहीं ये हैं हाला,
कोई डूबे इसमें, कोई बचने वाला | | -ABZH

8.
ऐ आसमान तेरे पास बादलों के सिवा हैं ही क्या,कि तू देख तो जरा इन सितारों ने अपनी दुनिया कहीं और बनाई हैं !! -ABZH

9.
तुम शायरों से न पूछों, क्या मंजिल ? क्या राहें? कि आखिरी में कमबख्त ! किसी शायरी पर ही दम तोड़ेगा !! -ABZH

10.
बिकने को क्या न बिके हैं, दिल के इस बाज़ार में,
किसी ने बेची जुबान यहाँ पर, तो कोई खुद बिका यहाँ प्यार में !! -ABZH

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