Mere Shayari 3.2

Posted: नवम्बर 7, 2011 in Uncategorized

1.
जुस्तुजू का माहासल क्या निकला बता दो,
साबित क्या करना तुम परचम फ़हरा दो !! -ABZH

2.
हम अब घर क्या बनाये,
क़यामत से मांगी महल बिक रही हैं,
क्या महफ़िल क्या मंजिल,
मोहब्बत की पूरी शहर बिक रही हैं !! -ABZH

3.
दुनिया की राहें बगैरत ही सही, कि हमने उनको भी जाते हुए देखा हैं !! -ABZH

4.
जो आँसू अगर न होते,
इन आँखों का नाम क्या होता,
इन्हें पत्थर की मोती कहती दुनिया,
फिर कोई रोता तो जाने क्या होता !! -ABZH

5.
वो आवाजें कहाँ खो गई,
इस वतन के नंगी गलियों में ,
उन्हें करता हैं आज याद कौन ?
सब मजे हैं रंग-रलियों में !! -ABZH ( शहीदों के प्रति)

6.
इंतज़ार हैं आज भी हमको कि कभी तो सितारा टूटेगा,
सूरज दिन से,चाँद रात से कि कभी तो नजारा रूठेगा !! -ABZH

7.
बदल गया जीवन का मतलब,
निरूद्देश हूँ मैं अब,
क्यों मैं सुनु ह्रदय की कलरव,
अवशेष क्या हैं अब !! -ABZH

8.
एक छोटी सी आरज़ू करो, अपने अंतर को रौशन कर दो,
बाहर का काम सूरज, चाँद और सितारों पर छोड़ दो !! -ABZH

9.
चलो ढूंढों तूफानों को कि उनका जिगर देखना हैं ,
आज उन सितम के फरिश्तों का दम देखना हैं !! -ABZH

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