Mere Shayari 3.3

Posted: दिसम्बर 12, 2011 in Uncategorized

1.
कि तेरा काफ़िला हर एक मोड़ पर नज़र आता हैं,आखिर हम गुजरे भी तो किस मोड़ से !! -ABZH

2.
छोड़ कर रास्ते मंजिल दूर चले जाते हैं ,
कहीं मिलते हैं तो कहीं बिछड़ जाते हैं !! -ABZH

3.
रुक गए दो कदम,
दो कदम चल दिए,
हम से तुम हो गए,
दो रास्ते बन गए !! -ABZH

4.
उन दिनों कमी नहीं थी,
आँखों में नमी नहीं थी,
उम्मीदें थी, चाहतें थी,
धड़कनें यूँ थमी नहीं थी !! -ABZH

5.
सोज़ में फिर शफ़क मिला शाम से,
चाँद बादलों में नाराज़ दिखा,
उस शाम नशे में हम डूबे कुछ ऐसे,
सामने अश्कों का परवाज़ दिखा !! -ABZH

6.
ऐ मौला तेरा आईना टूटा हैं, कि अब तेरे फैसले में रहते दाग हैं !! -ABZH

7.
ऐ ज़िन्दगी तू हमें आज़माती रही,
वक़्त के फैसले तू सुनाती रही,
कहीं सितारों से महफ़िल सजाती रही,
कहीं टूटे दीयों में बाती बुझाती रही !! -ABZH

8.
ऐ बादल घिर जा गहरे कारे,
दरिया,सागर सब तेरे सहारे,
ये धरती कब से तुझे पुकारे,
संदेशा गगन का लेकर आरे !! -ABZH

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