Aadmi

Posted: मई 13, 2012 in Uncategorized

हर तरफ़ हर जग़ह बेशुमार आदमी,
फिर भी तन्हाईयों का िशकार आदमी ।
सुबहों से शाम तक बोझ ढोता हुआ,
अपनी ही लाश पर खुद मज़ार आदमी ।
हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते,
हर तरफ आदमी का िशकार आदमी ।
रोज जीता हुआ रोज मरता हुआ,
हर नए दिन नया इंतज़ार आदमी ।
ज़िन्दगी का मुकद्दर सफ़र-दर-सफ़र,
आिख़री सांस तक बेक़रार आदमी । -निदा फाजली

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