Waqt ke toofan me

Posted: जून 10, 2012 in Uncategorized

वक़्त के तूफ़ान में,
हसरतों की दौड़ में,
हम खड़े रह गए,
जलजलों के मोड़ में !!

फिरदौस की थी आरज़ू,
नसीम-ए-सहर के कोर में,
महफिलों की रौनकें,
लूट गई किस भोर में,
कई कारवें शामिल हुए,
मोहब्बत तेरे गोर में,
दो चाहतों में दायरें,
बढ़ गए दो छोर में !!

राहें सूनी बिक गई,
मंजिलों की होड़ में,
आफ़ताबी सिलसिले,
बुझ गए किस शोर में,
दर्द मिला कातिल मिला,
रिश्तों की डोर में,
हम खुद से ही न मिल सके,
मुतासिब तेरे जोर में !!

वक़्त के तूफ़ान में,
हसरतों की दौड़ में,
हम खड़े रह गए,
जलजलों के मोड़ में !!

-Chandra Tewary [ABZH]

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