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Posted: अगस्त 3, 2012 in Uncategorized

सुन मोरे बंधू,
सुन मोरे भईया,
मोह समंदर मध्य,
डोले जीवन नईया,
न पतवार हैं कोई,
न है कोई खेवईया,
अज्ञात किनारा,
कौन पार लगईया,
ये जीव-जगत,
एक भूल-भुलईया,
नित जीने-मरने की,
यहाँ हईया-हईया,
किसको पता हैं,
ईश्वर की लिखईया,
दुःख-दरद के,
यहाँ कौन गवईया,
लोभी लोचन,
जोहे रास-रसईया,
सुनने को अपनी,
बोल-बड़ईया,
आपस में सबकी,
मार-लड़ईया,
यहाँ कोई न चाहे,
फूल-पतईया,
सब हीरे-मोती की,
मांगे मड़ईया,
सुनो मेरे बंधू,
सुनो मेरे भईया,
मोह समंदर मध्य,
डोले जीवन नईया !! -Chandra Tewary [ABZH]

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