Mitne Ka Adhikar

Posted: अप्रैल 16, 2013 in Uncategorized

वे मुसकाते फूल नहीं –
जिनको आता है मुरझाना
वे तारों के दीप नहीं –
जिनको आता है बुझ जाना।

वे नीलम के मेघ नहीं –
जिनको है घुल जाने की चाह
वह अनंत ऋतुराज नहीं –
जिसने देखी जाने की राह

वे सूने से नयन, नहीं –
जिनमें बनते आंसू मोती
वह प्राणों की सेज, नहीं –
जिसमें बेसुध पीड़ा सोती।

ऐसा तेरा लोक वेदना-
नहीं, नहीं जिसमें अवसाद,
जलना जाना नहीं, नहीं –
जिसने जाना मिटने का स्वाद।

क्या अमरों का लोक मिलेगा
तेरी करुणा का उपहार?
रहने दो हे देव ! अरे
यह मेरे मिटने का अधिकार।

-महादेवी वर्मा

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