Ghan

Posted: जुलाई 15, 2013 in Uncategorized
ये घन हैं घना,
गगन पर तना,
धरती पर जीवन का,
हैं कारण बना । 
पर्वत के ऊपर,
या भूमि के भीतर,
इस वातावरण के,
कण-कण के अंतर,
पौधे का पत्तर,
या हो कोई जंतर,
इसने ही डाला,
हर रचना में मंतर । 
बिजली से लड़कर,
सूरज पर चढ़कर,
करे बूँदों की वर्षा, 
ये सर्वस्व खोकर,
प्रकृति के तन पर,
आभूषण ये बनकर,
करे सृष्टि-रूप अलंकृत,
जल-जीवन गढ़कर। 
ये जल से बना,
ये जल में फ़ना,
करे गर्जन और कम्पन,
तो श्रावण बना । -चन्द्र शेखर तिवारी

 

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