Seene Me Jalan

Posted: जनवरी 25, 2014 in Uncategorized

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यों हैं,
इस शहर में हर शख्श परेशान सा क्यों हैं ॥

दिल हैं तो, धड़कने का बहाना कोई ढूंढे,
पत्थर की तरह बेहिसो बेजान सा क्यों हैं ॥

तनहाई की यह कौन सी मंज़िल हैं रफ़ीक़ो,
ताहद्दे नजर एक बयाबान सा क्यों हैं ॥

क्या कोई नयी बात नजर आती हैं हम में,
आईना हमें देख के हैरान सा क्यों हैं ॥ -शहरयार

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