Kuchh Ameeron Ke Ghar Mein

Posted: जनवरी 26, 2014 in Uncategorized

कुछ अमीरों के घर में वो कागज़, कलम हैं, 
लिखे जिनकी किस्मत उन गरीबों में हम हैं ॥

ज़ुल्म-ओ-क़वाइद जिनका दैर-ओ-हरम हैं,
उन्हें सलाखों में डाले वो कानून अभी कम हैं ॥ 

कोई करे दुनिया भी शामिल हमें दिखनेवाले,
हमारी सपनों की दुनिया के दिये बुझनेवाले ॥

अब तक मिले कितने शायर हमें लिखनेवाले,
अमीरों की शोहरत में ये कलम बिकनेवाले ॥ 

कोई फसल काँट ले या फिर ज़मीं छीने अपनी,
मोड़े हवाओं का आँचल या आसमां का पानी ॥

इस सोने से मिट्टी की लगाओ कीमत कुछ भी,
खून बहा हैं उसमे हमारा, वही हैं हमारी कहानी ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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