Hauslo Ke Tarz Par

Posted: मार्च 9, 2014 in Uncategorized

हौसलो के तर्ज़ पर, अब बेख़ौफ़ सांस लीजिये,
कि आप हैं तो हम भी हैं, एक इंकलाब कीजिये ॥

तलाशी गिरेहबान की, चाहे सौ दफा ले लीजिये,
हमारी भी ज़ुबान हैं, कुछ इस पर यकीन कीजिये ॥

मुनाफ़िक़ पसन्द ये सुने, आप रियाकारिया न कीजिये,
इंसानियत की नीव पर, अब अपनी राह मोड़ लीजिये ॥

समंदर में मिलेंगे रास्ते, ये कश्ती तो चलने दीजिये,
साहिल का जो भी हो पता, तूफ़ान से लड़ के लीजिये ॥

जब बेबाक हैं इरादे तो, आप उन्हें भी साथ लीजिये,
जो कटे-बटे हैं आज तक, उनके लौ को तेज कीजिये ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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