Neemat Hain Uski

Posted: जुलाई 27, 2014 in Uncategorized

कि नीमत हैं उसकी तो ये हालात कम हैं,
हमें अपनी नाकामियों से कहाँ कोई ग़म हैं,
नफरतों और जफ़ाओं के दैर-ओ-हरम हैं,
कहो किसके खुदा का क़यामत करम हैं ॥

चलो रूह-ओ-नज़र एक आइना तराशे,
करे नाशाद ये दिल हर हक़-आशना से,
शब-ओ-रोज़ इबादत करे अपने खुदा से,
फिर मुहब्बत से जी ले, फिर जी ले वफ़ा से ॥

अकबर हो या सिकंदर जहां सबसे छूटा,
कुछ मिट्टी के पुतलों ने मिट्टी को लूटा,
हुआ खून जाया वो अबदियत था झूठा,
तसलीम नहीं था कि मुकद्दर था फूटा ॥

कहो अब भी तुम्हें क्या आज़माना हैं बाकी,
कि और कितने छींटें लहू के छिपाना हैं बाकी,
कहाँ-कहाँ ज़ुल्म-ओ-हुकूमत चलाना हैं बाकी,
कि और क्या-क्या खुदा को दिखाना हैं बाकी ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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