Is Jahaan Mein

Posted: अगस्त 17, 2014 in Uncategorized

इस जहां में जो ताशीर हैं, हैं तेरे ही किरदार का,
खुदा न बन सका तो क्या, शहरयार हैं बाजार का॥

हर जवाब तेरा हैं लिखा, जो भी हैं तेरे सवाल का,
फिर भी खुदा का नाम ले, तू हाकिम हैं कमाल का ॥

कुश्त-ओ-खून ये फ़ुज़ूल हैं, जुबां से डर कर हम मरे,
अब इन्साफ क्या मिले हमें, तू जो कहे वो हम करे ॥

वो चाँद जो खिला था कल, वो भी दाग़-दार हो गया,
अब ज़मीं पर देखता नहीं, हो बे-दार फिर वो सो गया ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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