Uske Shahar Se

Posted: नवम्बर 3, 2014 in Uncategorized

उसके शहर से मिलता-जुलता, नाम-ओ-शहर ढूँढ लाये कोई,
हमको यकीन हैं वो फिर मिलेंगे, इश्क़-ओ-ज़हर ढूँढ लाये कोई ॥

तिनकों के घर से हिलता-डुलता, ख्वाबों के घर अब बनाये कोई,
दिल के सफर में हम फिर चलेंगे, राह-ओ-डगर तो बताये कोई ॥

खून-ए-जिगर में शरार सा जलता, आफत-ए-जान बन जाये कोई,
अगर मंज़ूर नहीं तक़सीम के फिकरे, एक और दफा आज़माएं कोई ॥

न ज़ौक़-ए-नज़र, न ख़याल से रफ्ता, कहो कैसे खुदा बन जाये कोई,
लहरों को हासिल साहिल नहीं पर, कोई कश्ती हो पार लगाये वो ही ॥

कितने शीश-महल में आते-जाते, कभी मिट्टी के घर भी जाये कोई,
इंसाफ नहीं, तक़दीर जो लिखते, किसे फ़रियाद अब सुनाये कोई ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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