Na Tumse Hoga

Posted: दिसम्बर 23, 2014 in Uncategorized

इस लहर में पुकार न तुमसे होगा,
ये तरी, उस पार न तुमसे होगा ॥

जब हिये रहे क्षणिक जग-मग में,
जब पुष्प के मोह जिए तुम जग में,
जब काँटें नहीं चुभे कभी पग में,
जब स्वार्थ लिए ओढ़ रग-रग में,
इस तिमिर में विकार न तुमसे होगा,
इस विपद, प्रतिकार न तुमसे होगा॥

जब धर्म हो ओछे सिमटे पत्थर में,
जब निष्ठुर भाव बहे अन्तर में,
जब अहम हो अधम उठे अम्बर में,
जब एकात्म नहीं रहे ईश्वर में,
कोई भव्य हुंकार न तुमसे होगा,
कोई दिव्य अवतार न तुमसे होगा॥

इस लहर में पुकार न तुमसे होगा,
ये तरी, उस पार न तुमसे होगा ॥

जहाँ न शौर्य रहे, न अनल बहे,
जहाँ न दुर्बल की पीड़ा सबल सहे,
जहाँ लोभ के वश में सकल रहे,
जहाँ अपनों के घर में दखल रहे,
वहाँ नीति स्वीकार न तुमसे होगा,
वहाँ जीत और हार न तुमसे होगा ॥

इस लहर में पुकार न तुमसे होगा,
ये तरी, उस पार न तुमसे होगा ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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