Haar Ho Kaise

Posted: अप्रैल 13, 2015 in Uncategorized

ऐ पथिक ! तू पथ को पार हो कैसे?
जो हिय नहीं माने, तो हार हो कैसे ?

पग-पग कंटक पथ में बिछे हो,
लक्ष्य-हीन हो पथिक चले हो।
जब चार पहर हो सूर्य ढले हो,
तम के भय से दम निकले हो।

डग-मग करते कदम अड़े हो,
पथ में संकट विकट खड़े हो।
घन के गर्जन से गगन डरे हो,
जब चहुँ दिशायें बंद पड़े हो ।

धैर्य-हीन हो मन भटके हो,
शब्द-हीन हो स्वर अटके हो ।
साँसों के कण-कण छटके हो,
ज्यों प्राणों से ये तन लटके हो ।

अनवरत बढ़ने की चाह हटे हो,
हर साथ छूटे, हर राह बटे हो ।
लत-पथ पग और गात कटे हो,
प्रति-पल जीवन-पात घटे हो ।

ऐ पथिक ! तू पथ को पार हो कैसे?
जो हिय नहीं माने, तो हार हो कैसे ?

-चन्द्र शेखर तिवारी

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