Charaag Jalkar dhuaan

Posted: जून 28, 2015 in Uncategorized
चराग जलकर धुआँ खुद ही बना होगा,
जो आरज़ू थी दिल की तो जला होगा ॥
 
मोड़ पे मोड़ छूटे होंगे जब चला होगा,
जाने फिर कितने दफा बुझ के ये जला होगा ॥
 
न जाने राहों में ये कितनों से मिला होगा,
पिन्हां नहीं यहाँ कुछ तन्हा ही चला होगा ॥
 
हवा के खौफ में भी दिन-रात चला होगा,
आब-ओ-हवा हो कुछ भी बेबाक जला होगा ॥
 
जला हो या बुझा हो किसे क्या गिला होगा,
तिनके से बना था तो तिनका ही जला होगा ॥
 
फलाकत कहे ज़माना या फक्र करे इस पर,
मुस्तक़बिल ने जो लिखा था कहाँ टला होगा ॥ -चन्द्र शेखर तिवारी

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