Maqsad Kuchh Aur Nahi

Posted: फ़रवरी 28, 2016 in Uncategorized

मक़सद कुछ और नहीं बस एक तमाशा खड़ा करना हैं,
हम आज़ाद हैं इस आज़ादी का बियाबां बयां करना हैं ।

करोड़ों के घर रोज़ फाके चले मगर हमें कहाँ लड़ना हैं,
बेवज़ह कहीं जंग-ओ-जदल की फ़र्ज़ पर अड़ा रहना हैं ।

जहाँ मंदिर बने, वहीँ मस्जिद बने, किसे आगे यहाँ बढ़ना हैं,
न भगवान मिले, न अल्लाह मिले, लड़-लड़ कर हमें मरना हैं ।

कई हुजूर हैं हमारे उक़्दो के, अपनी बातों पर कहाँ चलना हैं,
दुसरो की जुबां, दुसरो की दखल, ऐसी आज़ादी में हमें पलना हैं । -चन्द्र शेखर तिवारी

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