Uske Ghar Tum

Posted: मई 17, 2016 in Uncategorized
उसके घर तुम कभी नहीं जाना, वो ईमान पूजता हैं,
वो न अल्लाह, वो न ईसा को, वो न राम पूजता हैं ।
 
वो बेनसीब, वो हैं हारा-भटका, वो आराम ढूँढ़ता हैं,
हम सब जाने अपने रस्ते-मंजिल, वो नाकाम ढूँढ़ता हैं ।
 
मिट्टी ही उसको चाँदी-सोना, वो न दाम देखता हैं,
हम ज़रदारी, हम व्यापारी, वो तमाम बेचता हैं ।
 
मात मिले या जीत हो हासिल, वो मक़ाम सोचता हैं,
सबकी चाहत उम्मीद से ज्यादा, वो अंजाम सोचता हैं ।
 
उसका कहीं नहीं आना-जाना, वो सलाम भेजता हैं,
कोई हो मालिक सारे जहां का, वो एहतेराम भेजता हैं । -चन्द्र शेखर तिवारी

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