Jee Lo Abhi

जी लो अभी तुम ज़िन्दगी,
न जाने ये कब छुट जाए,
इशारे धड़कनों की समझो कभी,
न जाने ये कब रूठ जाए !!

तुम इन बेनाम राहों को इतना न मोड़ो,
हर एक मंजिल से रिश्ता इनका न जोड़ो,
फिर आशियाने बनेंगे तुम तिनके तो जोड़ो,
मुकद्दर में क्या लिखा हैं उन बातों को छोड़ो !!

भर लो अभी तुम त्रिष्णगी,
न जाने ये कब मिट जाए,
इज़ाज़त मोहब्बत की ले लो अभी,
न जाने ये कब रीति जाए !!

-ABZH

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